मेरे जूतों की पुकार

By Bhargavi G. Iyer माना कि जब जुहू की मिट्टी से भर जाते, मैंने उन्हें खूब धोया-पीटा है। लोकल ट्रैन की भीड़ में घुसते-घुसाते, भागते-चढ़ते, प्लैटफॉर्म पे घसीटा है।

वतन-ए-हिन्द

By Vrinda Tiwari इस वतन-ए-हिन्द में मची तबाही की कहानी है ये शाही इख़्तियारत की खिदमत कर रहे ए हिंदुस्तान के हामील इन हुकुमकारों की बेईमानी की कहानी है ये हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई मज़हब के नाम पर हुए बटवारे से डर मत ऐ दोस्त

बरसात की आवाज़ मुझे याद नहीं

By Bhargavi G. Iyer कई बादल गुज़र चुके हैं । नदियां, झरने, सब रुके हैं । मिट्टी में दरारें पड़ने लगी हैं, जग में सारे जग सूखे हैं ।

Kirit P. Mehta School of Law Publications